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India’s FDI Scenario in May-June 2025: A Mixed Picture | भारत में मई-जून 2025 का FDI परिदृश्य: एक मिश्रित तस्वीर

भारत की अर्थव्यवस्था में विदेशी निवेश यानी FDI हमेशा से एक बड़ा टॉपिक रहा है। मई और जून 2025 में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मासिक बुलेटिन के मुताबिक, इस दौरान Gross FDI यानी कुल विदेशी निवेश काफी मजबूत रहा, लेकिन Net FDI में कमी आई। इसका कारण है भारतीय कंपनियों का बाहर की ओर निवेश यानी Outward FDI और विदेशी कंपनियों द्वारा पैसा वापस ले जाना। आइए, इस विषय को आसान शब्दों में समझते हैं और जानते हैं कि ये हमारे लिए क्यों जरूरी है।

India’s FDI Scenario in May-June 2025: A Mixed Picture | भारत में मई-जून 2025 का FDI परिदृश्य: एक मिश्रित तस्वीर

सामग्री की तालिका (Table of Contents)

FDI क्या है और क्यों जरूरी है?

सबसे पहले ये समझ लेते हैं कि FDI यानी Foreign Direct Investment क्या होता है। आसान शब्दों में, जब कोई विदेशी कंपनी या निवेशक भारत में पैसा लगाता है, जैसे फैक्ट्री खोलने, कारोबार शुरू करने या किसी कंपनी में हिस्सेदारी खरीदने के लिए, तो उसे FDI कहते हैं। ये पैसा भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है। इससे नौकरियां बढ़ती हैं, नई टेक्नोलॉजी आती है और देश का विकास होता है। Gross FDI वो कुल पैसा है जो भारत में आता है, जबकि Net FDI उस पैसे को कहते हैं जिसमें से विदेशी कंपनियों का वापस लिया पैसा और भारतीय कंपनियों का बाहर निवेश घटा दिया जाता है।

मई-जून 2025 में Gross FDI की स्थिति

RBI की ताजा रिपोर्ट के अनुसार मई और जून 2025 में Gross FDI में अच्छी बढ़ोतरी देखी गई। जून में Gross FDI 9.2 बिलियन डॉलर रहा, जो मई के 7 बिलियन डॉलर से काफी ज्यादा है। यानी विदेशी निवेशक भारत में पैसा लगाने के लिए उत्साहित हैं। ये एक अच्छा संकेत है क्योंकि इससे पता चलता है कि भारत अब भी निवेश के लिए आकर्षक जगह है। खासकर मैन्युफैक्चरिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और एनर्जी जैसे सेक्टर में FDI का बड़ा हिस्सा आया।

नीचे दी गई तालिका से आप मई और जून के Gross FDI की तुलना समझ सकते हैं:

महीना Gross FDI (बिलियन डॉलर में)
मई 2025 7.0
जून 2025 9.2

Net FDI में कमी का कारण

अब बात करते हैं Net FDI की। जून 2025 में Net FDI केवल 1 बिलियन डॉलर रहा, जो पिछले साल जून के 2.2 बिलियन डॉलर से 52% कम है। इसका मतलब ये नहीं कि विदेशी निवेश कम हो रहा है, बल्कि दो बड़े कारण हैं। पहला, विदेशी कंपनियां भारत से अपने मुनाफे का पैसा वापस ले जा रही हैं, जिसे repatriation कहते हैं। दूसरा, भारतीय कंपनियां विदेश में ज्यादा निवेश कर रही हैं, जिसे Outward FDI कहते हैं।

RBI की बुलेटिन के मुताबिक जून 2025 में repatriation 5.7 बिलियन डॉलर रहा, जो मई के 5 बिलियन से ज्यादा है। साथ ही Outward FDI 2.5 बिलियन डॉलर रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 88% ज्यादा है। इन दोनों की वजह से Net FDI कम हो गया।

“भारत में Gross FDI जून में चार साल के उच्च स्तर पर पहुंचा, लेकिन repatriation और Outward FDI की वजह से Net FDI में कमी आई।” – RBI बुलेटिन, जून 2025

प्रमुख देशों का योगदान

जून 2025 में Gross FDI का तीन-चौथाई हिस्सा अमेरिका, साइप्रस और सिंगापुर से आया। ये देश भारत में निवेश के लिए सबसे बड़े स्रोत हैं। खास बात ये है कि ये निवेश भारत के विदेशी मुद्रा भंडार यानी forex reserve के लिए स्थिर स्रोत माना जाता है। नीचे दी गई तालिका में आप प्रमुख देशों के योगदान को देख सकते हैं:

देश FDI का हिस्सा
अमेरिका ~25%
साइप्रस ~25%
सिंगापुर ~25%
अन्य ~25%

ये देश भारत में मैन्युफैक्चरिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और कम्युनिकेशन जैसे सेक्टर में निवेश कर रहे हैं। इससे भारत में नई टेक्नोलॉजी और रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं।

FDI और भारत की अर्थव्यवस्था

FDI भारत के लिए क्यों जरूरी है? ये सवाल हर किसी के मन में हो सकता है। Gross FDI से भारत में नए कारखाने खुलते हैं, नई टेक्नोलॉजी आती है और लोगों को नौकरियां मिलती हैं। लेकिन जब Net FDI कम होता है, तो इसका मतलब है कि भारत से पैसा भी बाहर जा रहा है। फिर भी RBI का कहना है कि ये एक परिपक्व बाजार का संकेत है। यानी विदेशी निवेशक आसानी से भारत में आ-जा सकते हैं, जो अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा है।

मई-जून में Gross FDI का बढ़ना दिखाता है कि भारत अब भी निवेशकों के लिए पसंदीदा जगह है। लेकिन Outward FDI और repatriation की वजह से Net FDI कम हुआ है। इसका मतलब ये नहीं कि भारत में निवेश की रुचि कम हो रही है। बल्कि भारतीय कंपनियां अब ग्लोबल मार्केट में अपनी जगह बना रही हैं।

FDI भारत के forex reserve के लिए स्थिर स्रोत है, जो portfolio flows से ज्यादा भरोसेमंद है।” – अर्थशास्त्रियों की राय

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

विशेषज्ञों का मानना है कि Gross FDI का बढ़ना भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था का सबूत है। लेकिन Net FDI में कमी का मतलब ये नहीं कि निवेशक भारत से मुंह मोड़ रहे हैं। बल्कि ये दिखाता है कि भारत का बाजार अब इतना परिपक्व हो गया है कि कंपनियां आसानी से निवेश कर सकती हैं और मुनाफा कमा कर निकाल भी सकती हैं। RBI ने भी अपनी बुलेटिन में कहा है कि ये एक सकारात्मक संकेत है।

कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को FDI को और बढ़ाने के लिए नीतियों को और सरल करना चाहिए। जैसे, टैक्स में छूट देना, बिजनेस करने की प्रक्रिया को आसान करना और राज्यों में निवेश को बढ़ावा देना। इससे Net FDI में भी सुधार हो सकता है।

निष्कर्ष

मई-जून 2025 में भारत का FDI परिदृश्य मिला-जुला रहा। Gross FDI ने दिखाया कि विदेशी निवेशक भारत पर भरोसा कर रहे हैं। लेकिन repatriation और Outward FDI की वजह से Net FDI में कमी आई। फिर भी ये चिंता की बात नहीं है। भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत है और निवेशक इसे एक अच्छी जगह मानते हैं। सरकार अगर नीतियों को और बेहतर करे तो FDI और बढ़ सकता है। इससे नौकरियां बढ़ेंगी और भारत का विकास और तेज होगा।

आप क्या सोचते हैं? क्या भारत को और FDI लाने के लिए कुछ नए कदम उठाने चाहिए? हमें कमेंट में बताएं।

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