हाल ही में अमेरिका ने भारत पर 50% Tariff लगाने का ऐलान किया है ये खबर भारतीय व्यापारियों और सरकार के लिए बड़ा झटका है। Tariff का मतलब है कि भारत से अमेरिका जाने वाले सामान पर अब ज्यादा taxes देना होगा। इससे कई उद्योगों पर effect पड़ेगा। आइए जानते हैं कि ये टैरिफ क्या है इसका भारत पर क्या असर होगा और भारत सरकार इसका जवाब कैसे दे रही है। ये article आसान शब्दों में लिखा गया है ताकि हर कोई समझ सके।
Table of Contents सामग्री तालिका
- टैरिफ क्या है?
- क्यों लगाया गया 50% टैरिफ?
- किन सेक्टर्स पर असर पड़ेगा?
- भारत का जवाब क्या है?
- आम लोगों पर असर
- उद्योगपतियों की राय
- आगे क्या होगा?
Tariff क्या है?
टैरिफ एक तरह का टैक्स होता है जो सरकारें आयात या निर्यात होने वाले सामान पर लगाती हैं। अमेरिका ने भारत से आने वाले सामान पर 50% टैरिफ लगाया है। इसका मतलब है कि अगर कोई सामान 100 रुपये का है तो उस पर 50 रुपये अतिरिक्त टैक्स देना होगा। इससे सामान महंगा हो जाता है और अमेरिका में भारतीय सामान की कीमत बढ़ जाएगी। ये टैरिफ 7 अगस्त 2025 से लागू हो चुका है और कुछ सामानों पर 28 अगस्त से और बढेगा।
क्यों लगाया गया 50% Tariff ?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि भारत रूस से तेल खरीद रहा है जो उन्हें पसंद नहीं। ट्रंप का कहना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के समय भारत का रूस से तेल खरीदना गलत है। इसलिए उन्होंने पहले 25% टैरिफ लगाया और अब अतिरिक्त 25% जोड़कर कुल 50% Tariff कर दिया। भारत का कहना है कि वो अपनी 1.4 अरब जनता की ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस से तेल खरीद रहा है। भारत ने इसे “अनुचित और गलत” बताया है।
“भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस से तेल खरीदता है। ये हमारा हक है। अमेरिका का टैरिफ अनुचित है।” – भारत के विदेश मंत्रालय
किन सेक्टर्स पर असर पड़ेगा?
ये 50% Tariff कई भारतीय उद्योगों को प्रभावित करेगा। खासकर उन सेक्टर्स पर जो अमेरिका को सामान निर्यात करते हैं। नीचे एक तालिका है जिसमें प्रभावित सेक्टर्स और उनके नुकसान की जानकारी दी गई है।
सेक्टर | निर्यात (लगभग) | संभावित नुकसान |
---|---|---|
टेक्सटाइल | 36 बिलियन डॉलर | 28% तक व्यापार कम हो सकता है |
जेम्स और ज्वेलरी | 10 बिलियन डॉलर | प्रतिस्पर्धा में कमी, कीमत बढ़ेगी |
ऑटो पार्ट्स | 7 बिलियन डॉलर | महंगे सामान की वजह से ऑर्डर कम |
सीफूड | 6 बिलियन डॉलर | 24,000 करोड़ का नुकसान संभव |
हालांकि फार्मास्यूटिकल और सेमीकंडक्टर जैसे सेक्टर्स को अभी छूट दी गई है। लेकिन भविष्य में इन पर भी टैरिफ लग सकता है।
भारत का जवाब क्या है?
भारत सरकार ने कहा है कि वो अपने हितों की रक्षा करेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वो किसानों और मछुआरों के हितों से समझौता नहीं करेंगे। भारत अब नए बाजार तलाश रहा है जैसे यूरोप और एशिया। साथ ही सरकार छोटे उद्योगों को लोन और सब्सिडी दे सकती है। भारत ने अमेरिका से बातचीत जारी रखने की बात कही है। 25 अगस्त को छठे दौर की व्यापार वार्ता होगी।
“हम अपने किसानों और मछुआरों के हितों से समझौता नहीं करेंगे। मैं व्यक्तिगत कीमत चुकाने को तैयार हूँ।” – पीएम नरेंद्र मोदी
आम लोगों पर असर
ये Tariff आम लोगों पर भी असर डालेगा। भारतीय सामान अमेरिका में महंगा होगा तो वहां बिक्री कम होगी। इससे भारत में नौकरियां जा सकती हैं। खासकर टेक्सटाइल और ज्वेलरी जैसे सेक्टर्स में। साथ ही रुपये की कीमत भी कम हो सकती है जिससे आयात महंगा होगा। इसका असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
उद्योगपतियों की राय
कई बड़े उद्योगपतियों ने इस टैरिफ पर चिंता जताई है। आनंद महिंद्रा ने कहा कि भारत को अब कारोबार करने की प्रक्रिया को आसान करना चाहिए। उनका कहना है कि ये टैरिफ एक मौका हो सकता है अगर भारत तेजी से सुधार करे। वहीं कुछ कारोबारी चाहते हैं कि भारत भी अमेरिका पर टैरिफ लगाए। लेकिन सरकार अभी सावधानी से कदम उठा रही है।
“ये टैरिफ एक मौका है। भारत को कारोबार आसान करना चाहिए और नए बाजार तलाशने चाहिए।” – आनंद महिंद्रा
आगे क्या होगा?
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता अभी रुकी नहीं है भारत चाहता है कि Tariff कम हो और दोनों देशों के बीच बेहतर समझौता हो लेकिन ट्रंप ने कहा है कि जब तक टैरिफ का मसला हल नहीं होता वो और बातचीत नहीं करेंगे। भारत अब ब्रिक्स देशों जैसे ब्राजील और चीन के साथ भी बात कर रहा है। अगर ये टैरिफ long समय तक रहा तो भारत की economy को 0.8 percent तक नुकसान हो सकता है। भारत के लिए ये समय चुनौतीपूर्ण है लेकिन सरकार और उद्योगपति इसे एक मौके के रूप में भी देख रहे हैं। नए बाजार तलाशने और घरेलू उद्योगों को strong करने से भारत इस टैरिफ के असर को कम कर सकता है twistkhabar.com पर ऐसी ही news के लिए बने रहें।